UP Polytechnic Promotion Scam को लेकर उत्तर प्रदेश के Technical Education Department में गंभीर प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। इस पूरे प्रकरण की परतों को बेबाकी से उजागर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं बेबाक लेखक Anil Tiwari ने विभागीय व्यवस्थाओं और कथित मनमानी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्राविधिक शिक्षा सेवा संघ के पूर्व महामंत्री Dr. RB Singh ने अब All India Council for Technical Education (AICTE) में एक औपचारिक शिकायत और याचिका दायर की है। उनका सीधा आरोप है कि नियमों और शासनादेशों को ताक पर रखकर अपात्र लोगों को Head of Department (HOD) के पदों पर बैठाया गया है।
UP Polytechnic Promotion Scam और विभागीय सिंडिकेट के आरोप
इस विवाद के केंद्र में संघ के वर्तमान अध्यक्ष Vivek Kumar Srivastava का बढ़ता प्रशासनिक दखल बताया जा रहा है। शासन से लेकर Directorate तक संघ प्रमुख का प्रभाव इस कदर हावी है कि प्रशासनिक निर्णय नियमों के बजाय व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर लिए जाने के आरोप लग रहे हैं।
वरिष्ठ लेखक Anil Tiwari के अनुसार, विभाग के भीतर मलाईदार पदों पर बैठे अधिकारियों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार हो चुका है जो विभागीय मंत्री तक वास्तविक शिकायतों को पहुंचने ही नहीं देता। इस पूरे मामले में कुछ विशेष अधिकारियों की भूमिका पर सीधे तौर पर सवाल उठाए गए हैं।
मुख्य बिंदु और ताजा आंकड़े
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AICTE विनियम-2019 का उल्लंघन: नियमानुसार Head of Department के पदों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के माध्यम से सीधी भर्ती होनी चाहिए थी।
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राजकोष पर आर्थिक बोझ: Dr. RB Singh का दावा है कि पुरानी नियमावली के तहत की गई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय भार पड़ रहा है।
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सजातीय अधिकारियों का संरक्षण: विभागीय मंत्री के इर्द-गिर्द Avadhesh Patel और Kamal Kumar जैसे अधिकारियों की सक्रियता की बात कही गई है, जबकि Vikalp Kumar Singh और Aatm Prakash Singh की भूमिका पर्दे के पीछे से बताई जा रही है।
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असंतुलित पदस्थापना: सवाल उठाने वाले शिक्षकों को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जबकि रसूखदार अधिकारी महानगरों में बिना किसी खास शैक्षणिक दायित्व के तैनात हैं।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका):
| मुख्य पैरामीटर | आधिकारिक स्थिति / विवरण |
| मुख्य मुद्दा | UP Polytechnic Promotion Scam (अवैध HOD पदोन्नति का आरोप) |
| शिकायतकर्ता | Dr. RB Singh (पूर्व महामंत्री, प्राविधिक शिक्षा सेवा संघ) |
| जांच/शिकायत मंच | AICTE नई दिल्ली एवं High Court |
| विश्लेषक / ग्राउंड रिपोर्टर | Anil Tiwari, बेबाक लेखक |
| लागू होने योग्य नियम | AICTE Regulations 2019 (UPPSC सीधी भर्ती) |
| कथित उल्लंघन का तरीका | पुरानी नियमावली से DPC कर अयोग्य शिक्षकों को प्रोमोशन |
| वर्तमान स्थिति | मामला शासन, AICTE और High Court की निगरानी में |
सिद्धांतों के लिए OSD का पद त्याग और कानूनी लड़ाई
विभागीय कार्यशैली और कथित अनैतिक फैसलों से क्षुब्ध होकर Dr. RB Singh ने अपने पद के प्रभाव का उपयोग करने के बजाय एक कड़ा कदम उठाया। उन्होंने विभागीय मंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) जैसे महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा दे दिया।
Anil Tiwari अपनी बेबाक रिपोर्ट में रेखांकित करते हैं कि जहां अन्य अधिकारी सत्ता के गलियारों में रहकर व्यक्तिगत लाभ बटोरते रहे, वहीं Dr. Singh ने सिद्धांतों की खातिर सुदूर ग्रामीण अंचल के संस्थान में जाकर गरीब छात्राओं को पढ़ाना स्वीकार किया। अपने साथियों और विभागीय संघों द्वारा निजी स्वार्थों के कारण साथ छोड़ दिए जाने के बावजूद, वे अब अकेले ही High Court और AICTE के दरवाजे खटखटा रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल
यह मामला केवल कुछ पदोन्नतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और शासन की कार्यप्रणाली पर गहरा आघात है। छात्रों की पढ़ाई-लिखाई से दूर रहकर केवल राजनीतिक परिक्रमा करने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर अब सार्वजनिक बहस शुरू हो चुकी है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग में जारी यह आंतरिक खींचतान अब खुलकर शासन की चौखट तक पहुंच चुकी है। AICTE को भेजी गई शिकायत और High Court में विचाराधीन याचिकाओं पर आने वाला निर्णय ही यह तय करेगा कि उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नियमों का राज स्थापित होगा या फिर रसूख और सांठगांठ की यह व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।





