UP Technical Education Transfer Controversy ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और शैक्षिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। राजधानी Lucknow स्थित प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (BTE) में एक रसूखदार अधिकारी पिछले 8 से 10 वर्षों से एक ही मलाईदार पद पर कुंडली मारकर बैठे हैं। वरिष्ठ और निर्भीक खोजी पत्रकार अनिल तिवारी (बेबाक पत्रकार) की विशेष रिपोर्ट ने विभाग के भीतर मचे इस खेल और ट्रांसफर नीति की धज्जियां उड़ाने की बैकडोर साजिश का पर्दाफाश किया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सूत्रों के मुताबिक, इन महाशय पर विभागीय मंत्री जी का ऐसा वरदहस्त है कि सेवा नियमावली के नियमों को ताक पर रखकर इन्हें सालों से राजधानी में ही टिकाए रखा गया है। अब तबादला सत्र में राजफाश होने के खौफ से इन्हें उसी सीट पर बनाए रखने के लिए नियमों की बलि चढ़ाने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
UP Technical Education Transfer Controversy: BTE में 10 साल से मलाईदार कुर्सी और अवैध सिंडिकेट
प्राविधिक शिक्षा विभाग के गलियारों से सामने आई इस रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू तैनाती का तरीका है। बेबाक पत्रकार अनिल तिवारी के खुलासे के अनुसार, इन अधिकारी को लखनऊ में बनाए रखने के लिए पहले नियम विरुद्ध सम्बद्धीकरण (Attachment) का खेल खेला गया।
इसके बाद सेवा नियमावली के नियमों को दरकिनार करते हुए विभाग में एक तथाकथित ‘विशेष टेक्निकल सेल’ का गठन कर दिया गया। हकीकत यह है कि सेवा नियमावली में इस प्रकार के किसी भी सेल के गठन का कोई कानूनी या प्रशासनिक प्रावधान ही नहीं है। आरोप है कि अपने चहेते और सजातीय अधिकारियों को लखनऊ मुख्यालय में बनाए रखने और कथित अवैध वसूली सिंडिकेट को चलाने के लिए इस गैर-कानूनी व्यवस्था को तैयार किया गया।
मुख्य बिंदु और ताजा इनसाइड खुलासे
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10 साल से एक ही पद: विगत 8 से 10 वर्षों से राजधानी के BTE में निरंतर मलाईदार पद पर कब्जा।
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अवैध सेल का गठन: सेवा नियमावली के विरुद्ध जाकर विशेष टेक्निकल सेल बनाकर तैनाती को ढाल दी गई।
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टीचिंग कैडर से पूरी दूरी: मूल तैनाती अध्यापन के लिए होने के बावजूद सालों से ब्लैकबोर्ड और क्लासरूम से गायब।
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भेद खुलने का खौफ: यदि अधिकारी मूल संस्था वापस लौटे, तो विभाग में सालों से दबे बड़े वित्तीय और प्रशासनिक राज बाहर आ जाएंगे।
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Zero Tolerance को ठेंगा: CM Yogi Adityanath की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के बावजूद बैकडोर से कुर्सी बचाने की जुगत।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित तथ्य तालिका)
| विवरण बिन्दु | विभागीय स्थिति / रिपोर्ट के मुख्य तथ्य |
| संबंधित विभाग | प्राविधिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश (UP Technical Education) |
| संबंधित निकाय | बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (BTE), Lucknow |
| मूल संवर्ग | टीचिंग कैडर (राजकीय पॉलीटेक्निक में अध्यापन कार्य) |
| तैनाती की अवधि | पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार एक ही कुर्सी पर |
| वेतनमान / ग्रेड पे | ₹9,000 ग्रेड पे (Level-13A1 / 14 – प्रमुख सचिव स्तर के समकक्ष) |
| मूल पोस्टिंग स्थल | प्रयागराज स्थित संस्थान (जहां छात्र इनकी शक्ल तक नहीं पहचानते) |
| प्रमुख आरोप | अवैध सम्बद्धीकरण, ट्रांसफर नीति का उल्लंघन, क्लासरूम से नदारद |
| खोजी रिपोर्टर | अनिल तिवारी (बेबाक पत्रकार) |
ट्रांसफर नीति को दरकिनार करने का चक्रव्यूह: राजफाश होने की दहशत
उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक Transfer Policy के तहत एक ही पद और पटल पर वर्षों से जमे अधिकारियों का स्थानांतरण अनिवार्य होता है। लेकिन UP Technical Education Transfer Controversy में नियम पूरी तरह उल्टे चलाए जा रहे हैं।
बेबाक पत्रकार अनिल तिवारी की रिपोर्ट बताती है कि आलाकमान को इस बात की दहशत सताने लगी है कि यदि इन महाशय को नियमविरुद्ध संबद्धता समाप्त कर उनकी मूल संस्था भेजा गया, तो BTE के भीतर दबे कई बड़े राज और सिंडिकेट की परतें जनता के सामने आ जाएंगी। इसी डर की वजह से ट्रांसफर पॉलिसी का खुला उल्लंघन करते हुए इन्हें उसी पद पर बनाए रखने के लिए बैकडोर से फाइलें दौड़ाई जा रही हैं।
9000 ग्रेड पे और प्रमुख सचिव जैसा वेतन: गरीब छात्रों के हक पर डकैती
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू प्रदेश के होनहार और गरीब छात्रों के भविष्य से जुड़ा खिलवाड़ है। इन अधिकारी की मूल नियुक्ति प्रदेश के छात्रों को तकनीकी शिक्षा देने के लिए टीचिंग कैडर में हुई थी। लेकिन रसूख के चलते इन्होंने कभी चाक और डस्टर को हाथ तक नहीं लगाया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारी का लगातार प्रमोशन भी हो चुका है और वर्तमान में वे 9000 ग्रेड पे (Level-13A1/14) पा रहे हैं। प्रयागराज की जिस संस्था में इनकी तैनाती दिखाई गई है, वहां के छात्र-छात्राओं ने आज तक इनकी शक्ल तक नहीं देखी। शासन के प्रमुख सचिव स्तर का मोटा वेतन जनता के टैक्स से वसूलने वाले इस अधिकारी का मुख्य काम विभाग की बेहतरी के बजाय कथित तौर पर कुर्सी बचाना और सिंडिकेट चलाना बनकर रह गया है।
Zero Tolerance नीति को सीधी चुनौती: क्या CMO लेगा संज्ञान?
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार लगातार ‘Zero Tolerance’ नीति का दावा करती है, जहां भ्रष्टाचारियों और रसूखदारों के लिए कोई रियायत नहीं है। परंतु प्राविधिक शिक्षा विभाग में माननीय मंत्री जी की कथित जातिगत हमदर्दी और संरक्षण के चलते यह अधिकारी लखनऊ से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं।
तबादला नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर एक ही मलाईदार सीट पर दोबारा काबिज होने की इस कोशिश से विभाग के ईमानदार अधिकारियों, प्राध्यापकों और छात्रों में भारी आक्रोश फैल चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा, या नियमों को रौंदने वाला यह वीआईपी कल्चर यूं ही बेखौफ चलता रहेगा।





