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UP Polytechnic Transfer Scam: जातिगत तानाशाही और दलितों पर अत्याचार का आरोप

UP Polytechnic Transfer Scam को लेकर उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक भूचाल आ गया है। विभाग पर ट्रांसफर नीति के खुले उल्लंघन के साथ-साथ ‘जातिगत तानाशाही’ चलाने, नियम तोड़ने वाले रसूखदारों को मलाईदार पदों से नवाजने और ईमानदार दलितों एवं अन्य संवर्ग के कर्मचारियों को सुनियोजित तरीके से प्रताड़ित करने के बेहद संगीन आरोप लगे हैं।

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विभागीय स्तर पर सामने आई शिकायतों और लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, Transfer Policy 2026 के तय मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। एक तरफ जहां रसूखदार अधिकारी दशकों से चुनिंदा मलाईदार कुर्सियों पर जमे हैं, वहीं दूसरी ओर वंचित और ईमानदार वर्ग के कार्मिकों को लगातार उपेक्षा और प्रशासनिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है।

UP Polytechnic Transfer Scam: जातिगत तानाशाही और रसूखदारों की ‘अंगद’ जैसी पोस्टिंग

प्राविधिक शिक्षा विभाग के भीतर स्थानांतरण के नियमों को लेकर उपजा यह विवाद अब गंभीर प्रशासनिक व सामाजिक मोड़ ले चुका है। शासन की नीति के अनुसार हर अधिकारी का समयबद्ध और पारदर्शी स्थानांतरण होना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत में चहेते अफसरों को बार-बार घूम-फिरकर उन्हीं जिलों में भेजा जा रहा है जहां वे पहले से दशकों तक तैनात रहे हैं।

इस सिंडिकेट में प्रमुख रूप से चिन्हित किए गए मामले इस प्रकार हैं:

  • Sanjeev Singh: लखनऊ में 20 वर्ष से अधिक की लंबी सेवा पूरी करने के बाद भी इन्हें राजधानी में बनाए रखा गया। इतना ही नहीं, नियमों को दरकिनार कर इन्हें Principal पद के साथ Secretary, Joint Entrance Examination Council Uttar Pradesh (JEECUP) का दोहरा प्रभार भी सौंप दिया गया है।

  • Indrajeet Sachan (HOD, Government Polytechnic, Lucknow): शासकीय नियमों का खुला मखौल उड़ाते हुए पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से राजधानी लखनऊ में ही अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं।

  • P.K. Singh (Principal, Government Girls Polytechnic, Varanasi): झांसी मंडल में 20 से अधिक वर्षों तक तैनात रहने का रिकॉर्ड बनाने के बाद, दोबारा नियमों को ताक पर रखकर इन्हें झांसी मंडल के ही Government Polytechnic, Talbehat (Lalitpur) में पोस्टिंग दे दी गई।

  • P.N. Jaiswal (HOD, Chemical): कानपुर में 10 वर्ष से अधिक की लंबी तैनाती के बाद नीति के विरुद्ध दोबारा घूम-फिरकर इन्हें Government Polytechnic, Kanpur में ही तैनाती की सौगात दी गई है।

  • Aatm Prakash Singh (HOD, Computer Science): इनके संबद्धीकरण (Attachment) और पोस्टिंग का पहिया लगातार केवल Lucknow और Kanpur के बीच ही घूमता रहता है।

  • B.N. Chaudhary (Principal): स्थानांतरण नीति के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत इनका स्थानांतरण MMIT, Gorakhpur में किया गया है।

मुख्य बिंदु और ताजा आंकड़े

  • भेदभावपूर्ण व्यवस्था: ईमानदार दलितों और अन्य संवर्ग के कर्मियों के अधिकारों की अनदेखी कर रसूखदार सिंडिकेट को मलाईदार पोस्टिंग।

  • 20+ वर्षों का अनवरत ठहराव: राजधानी लखनऊ और झांसी मंडल जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों पर एक ही गुट का एकाधिकार।

  • दोहरा प्रभार आवंटन: JEECUP जैसी संवेदनशील संस्थाओं की बागडोर नियमों को शिथिल कर पसंदीदा अधिकारियों को दी गई।

  • जांच रिपोर्ट पर अभयदान: Government Polytechnic, Mohammadi (Lakhimpur) के HOD/Incharge Principal Pravesh Verma पर गंभीर आरोपों और तत्कालीन जांच रिपोर्ट के बावजूद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका):

अधिकारी का नाम पद / संस्था तैनाती का मुख्य केंद्र मुख्य आरोप / स्थिति
Sanjeev Singh Principal / Secretary, JEECUP Lucknow 20+ साल से तैनाती, दोहरा प्रभार
Indrajeet Sachan HOD, Govt Polytechnic Lucknow 20+ वर्षों से लखनऊ में निरंतर पदस्थ
P.K. Singh Principal Talbehat (Lalitpur) झांसी मंडल में 20+ साल बाद पुनः वापसी
P.N. Jaiswal HOD, Chemical Kanpur 10+ साल बाद पुनः कानपुर में तैनाती
Pravesh Verma HOD / Incharge Principal Mohammadi (Lakhimpur) जांच रिपोर्ट के बावजूद संरक्षण

अवैध Attachment का खेल और ‘विशेष तकनीकी सेल’ पर गहराया शक

UP Polytechnic Transfer Scam का एक और बड़ा पहलू अवैध संबद्धीकरण (Attachment) का नेटवर्क है। बिना किसी वैधानिक आधार के चहेते अधिकारियों को उनकी मूल संस्थाओं से हटाकर मनपसंद जगहों पर अटैच रखा गया है।

इस अवैध व्यवस्था के घेरे में कई नाम सामने आए हैं:

  • Vikalp Kumar Singh

  • Awdhesh Patel

  • Kamal Kumar

  • Rohit Katiyar

  • Jitendra Yadav

  • Rashmi Sonkar

  • Jitendra Maurya

  • Vivekanand

  • Alok Kumar

इन सभी अधिकारियों के संबद्धीकरण के वैधानिक आधारों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है। इसके अतिरिक्त, विभाग में गठित किए गए Special Technical Cell की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करोड़ों के संसाधन खपाने के बाद भी इसका परिणाम शून्य रहा है और यह केवल चहेतों को सुरक्षित ठिकाना देने का माध्यम बनकर रह गया है।

प्रशासनिक साख पर सवाल और CM Yogi Adityanath से सीधे हस्तक्षेप की गुहार

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार और भेदभाव के खिलाफ “Zero Tolerance Policy” के लिए जानी जाती है। ऐसे में प्राविधिक शिक्षा विभाग के भीतर चल रही जातिगत तानाशाही और ईमानदार दलित व अन्य वर्ग के कर्मचारियों के उत्पीड़न ने सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित संवर्ग और कर्मचारियों का कहना है कि जब तक इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ा नहीं जाता और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक पारदर्शी व्यवस्था संभव नहीं है। यही कारण है कि अब इस मामले में Chief Minister Yogi Adityanath से सीधे हस्तक्षेप और एक उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ चुकी है।

रिपोर्ट: अनिल तिवारी (बेबाक पत्रकार)

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