Ashish Patel Technical Education विभाग इन दिनों तबादलों, संलग्नीकरण (Attachment) और विभागीय पदोन्नति को लेकर बड़े विवादों के केंद्र में आ गया है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय और ओबीसी-दलित अधिकारों की मुखर राजनीति करने वाले ‘अपना दल (एस)’ के कोटे से कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के विभाग पर गंभीर पक्षपात और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!वरिष्ठ व बेबाक पत्रकार अनिल तिवारी द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासों के अनुसार, प्राविधिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नीति 2026 और सामान्य प्रशासनिक नियमों को दरकिनार कर मनमाने अटैचमेंट और ट्रांसफर का खेल खेला जा रहा है।
UP Polytechnic Transfer Dispute और अधिकारियों के तबादलों पर उठे सवाल
प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और प्राविधिक शिक्षा परिषद (BTE Board) में हालिया फेरबदल को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर राजकीय पॉलिटेक्निक को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिलाने वाले अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के प्रधानाचार्य मुकेश आनंद का स्थानांतरण सोनभद्र कर दिया गया, जिससे महत्वपूर्ण संस्थान प्रधानाचार्य विहीन हो गया। आरोप है कि यह कदम विभागीय चहेते अधिकारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया।
इसके अलावा, मिर्जापुर क्षेत्र में कार्यरत अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के अधिकारी बसंत लाल को सुदूर श्रावस्ती स्थानांतरित किए जाने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। वहीं बोर्ड कार्यालय में गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों और स्पाउस पॉलिसी के दावों के बावजूद कई अधिकारियों के तबादले कर दिए गए, जिनमें अभिमन्यु प्रसाद और रश्मि सोनकर के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।
मुख्य बिंदु और ताजा आंकड़े
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स्थानांतरण एवं संबद्धीकरण पर विवाद: ट्रांसफर पॉलिसी के नियमों की अनदेखी कर अधिकारियों को मूल तैनाती स्थल के बजाय बोर्ड और निदेशालयों में गैर-संवैधानिक रूप से अटैच रखने के आरोप।
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गंभीर बीमारी व स्पाउस पॉलिसी की अनदेखी: विशेष परिस्थितियों वाले अधिकारियों की अपीलों को खारिज कर दूर-दराज के जिलों में भेजने का दावा।
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DPC प्रक्रिया पर सवाल: केमिकल विभागाध्यक्ष एस.के. आजाद जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम प्रिंसिपल पद की डीपीसी सूची से कथित तौर पर बाहर रखने पर गहरा असंतोष।
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विभागीय अनुशासनिक मामलों में दोहरा रवैया: मोहम्मदी और कौशांबी के विवादित मामलों में कार्रवाई लंबित रहने, जबकि अन्य अधिकारियों पर तुरंत निलंबन की कार्रवाई होने का मुद्दा।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका)
| विवरण बिंदु | संबंधित तथ्य / रिपोर्ट के दावे | प्रशासनिक स्थिति / प्रभाव |
| संबंधित विभाग | प्राविधिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश | तकनीकी संस्थानों व पॉलिटेक्निक का संचालन |
| विभागीय कैबिनेट मंत्री | आशीष पटेल (अपना दल एस) | नीतिगत व प्रशासनिक नियंत्रण |
| मुख्य आरोप | मनमाना अटैचमेंट, स्थानांतरण नीति का उल्लंघन | पठन-पाठन प्रभावित, फील्ड में फैकल्टी की कमी |
| प्रमुख चर्चित केंद्र | लखनऊ बोर्ड कार्यालय, कानपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर | प्रशासनिक असंतोष एवं कार्यप्रणाली पर सवाल |
| खुलासाकर्ता / रिपोर्टर | अनिल तिवारी (बेबाक पत्रकार) | निष्पक्ष जांच और एजेंसी से ऑडिट की मांग |
BTEUP Attachment Syndicate और विशेष तकनीकी सेल का विवाद
आरोपों के मुताबिक, विभाग में एक असंवैधानिक ‘विशेष तकनीकी सेल’ और संबद्धीकरण व्यवस्था के माध्यम से कई अधिकारियों को फील्ड संस्थानों से हटाकर लखनऊ मुख्यालय और प्रमुख महानगरों में रखा गया है। इससे शिक्षण संस्थानों में छात्रों की कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और प्रशासनिक पदों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई प्रवक्ता व विभागाध्यक्ष अपनी मूल तैनाती की शाखाओं में जाए बिना वर्षों से मुख्यालय और बोर्ड कार्यालय में संबद्ध हैं। उदाहरण स्वरूप, विजय कुमार गुप्ता (लेक्चarrer IT) को आदेश संख्या 26260-79 (दिनांक 11 सितंबर 2026) के तहत बोर्ड में सहायक प्राचार्य के पद पर संबद्ध किया गया, जिसे नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। ऐसे अटैचमेंट से विभाग के मूल शैक्षणिक तंत्र और बजट दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
राजनीतिक निहितार्थ और CM Yogi Adityanath से उच्चस्तरीय जांच की मांग
‘अपना दल (एस)’ लगातार केंद्र और राज्य स्तर पर अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) और अनुसूचित जातियों (SC/ST) के अधिकारों की बात करता रहा है। ऐसे में Ashish Patel Technical Education विभाग के भीतर से उठे ये सवाल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर हैं, बल्कि राज्य के सियासी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
विभागीय जानकारों और पीड़ित अधिकारियों का कहना है कि जब सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और भ्रष्टाचार-मुक्त पारदर्शी प्रशासन का संकल्प लेकर चल रही है, तब प्राविधिक शिक्षा विभाग में जारी इस प्रकार की मनमानी की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
विशेष रिपोर्ट एवं इनपुट आभार:
बेबाक पत्रकार अनिल तिवारी





