UP Technical Education Scam ने उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक शुचिता और शासन के सख्त निर्देशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के स्पष्ट शासनादेश के बावजूद बैक-डोर से सम्बद्धीकरण आदेश जारी किए जा रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विभागीय स्तर पर सामने आए इस पूरे घटनाक्रम ने यह उजागर किया है कि शासन के उच्च निर्देशों की अवहेलना करते हुए सम्बद्धीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी रखी गई है।
UP Technical Education Scam और सम्बद्धीकरण का ताजा विवाद
ताजा मामला 11 सितंबर 2026 को सामने आया, जब Directorate of Technical Education द्वारा एक विवादित आदेश जारी किया गया। नियमों के अनुसार, बाबू पारस मौर्य राजकीय पॉलीटेक्निक, औराई में तैनात आईटी व्याख्याता Vijay Kumar Gupta को BTEUP (Board of Technical Education Uttar Pradesh) कार्यालय में सहायक प्राचार्य पद पर सम्बद्ध करने का निर्देश दिया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कड़ा दिशा-निर्देश है कि राजपत्रित अधिकारियों का सम्बद्धीकरण किसी भी परिस्थिति में न किया जाए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पद के लिए पहले एक अन्य अधिकारी का नाम Chief Minister Office को भेजा गया था। हालांकि, प्रक्रियागत अनियमितताओं की आशंका के चलते मुख्यमंत्री स्तर से उस फाइल पर तत्काल रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद, बैक-डोर से नया आदेश जारी करा लिया गया।
BTEUP में पूर्व अधिकारियों की अनवरत उपस्थिति
नियमों की अनदेखी का एक और उदाहरण BTEUP बोर्ड में देखा जा रहा है। बोर्ड में उप सचिव पद पर नियमित अधिकारी की तैनाती होने के बावजूद, पूर्व उप सचिव Manendra Kannaujia आज भी बोर्ड कार्यालय में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं।
पूर्व में भारी शिकायतों के बाद इनका स्थानांतरण Government Polytechnic Lucknow किया गया था। नियमों के मुताबिक इन्हें अपनी मूल संस्था में अध्यापन कार्य करना था, किंतु वे अभी भी बोर्ड कार्यालय में ही कार्यरत हैं।
मुख्य बिंदु और प्रशासनिक तथ्य
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आदेश की तारीख: 11 सितंबर 2026 को सम्बद्धीकरण का नया आदेश जारी हुआ।
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शासनादेश का उल्लंघन: राजपत्रित अधिकारियों के अटैचमेंट पर पूर्ण सरकारी प्रतिबंध के बावजूद तैनाती।
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सचिवालय की स्थिति: शासन के Principal Secretary को पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी से दूर रखा गया।
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संस्थानों पर प्रभाव: मूल संस्थाओं में फैकल्टी की अनुपस्थिति से कक्षाएं प्रभावित।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका):
| विवरण | तथ्य / वर्तमान स्थिति | संबंधित संस्थान / विभाग |
| मुख्य मामला | CM स्तर से रोकी गई फाइल के बाद बैक-डोर सम्बद्धीकरण | Technical Education Department UP |
| प्रमुख आदेश तिथि | 11 सितंबर 2026 | Directorate of Technical Education |
| सम्बद्ध अधिकारी | Vijay Kumar Gupta (व्याख्याता IT) | BTEUP कार्यालय |
| अन्य विवादित उपस्थिति | Manendra Kannaujia (पूर्व उप सचिव) | राजकीय पॉलिटेक्निक लखनऊ / BTEUP |
| दीर्घकालिक अटैचमेंट | Rohit Katiyar, Jitendra Yadav (11 वर्ष) | राजकीय पॉलिटेक्निक औराई / JD Office |
| नियामक संस्था नियम | Core Faculty का पृथक होना अनिवार्य | AICTE New Delhi |
पृष्ठभूमि, टाइमलाइन और सम्बद्धीकरण सिंडिकेट का इतिहास
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह समस्या किसी एक आदेश तक सीमित नहीं है। राजकीय पॉलिटेक्निक औराई लंबे समय से अटैचमेंट के लिए चर्चा में रहा है। व्याख्याता Rohit Katiyar वर्ष 2015 में सेवा में आने के बाद लगभग 11 वर्षों तक कागजों पर औराई में दर्ज रहे, जबकि वास्तव में वे Joint Director Office (Central Zone) में सम्बद्ध रहे। कानपुर स्थानांतरण के बाद ही उनका पुराना सम्बद्धीकरण समाप्त हुआ।
इसी प्रकार व्याख्याता Jitendra Yadav भी वर्ष 2015 से मूल संस्था छोड़कर संयुक्त निदेशक कार्यालय में बने रहे। वर्ष 2021 में URISE Portal के नाम पर सम्बद्ध किए गए व्याख्याताओं पर भी मूल शैक्षणिक कार्य छोड़कर प्रशासनिक व लिपिकीय कार्य देखने के आरोप हैं।
वर्तमान में BTEUP और संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद कार्यालयों में 20 से अधिक राजपत्रित अधिकारी और कर्मचारी सम्बद्ध बताए जा रहे हैं।
AICTE के कड़े नियम और छात्रों के भविष्य पर प्रभाव
एक तरफ जहां प्रदेश के राजकीय और महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों—जैसे बदायूं, गौतम बुद्ध नगर, शामली, बलिया और अमेठी—में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ व्याख्याताओं का कार्यालयों में अटैचमेंट जारी है।
All India Council for Technical Education (AICTE) के नियम स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं:
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Core Faculty की अनिवार्यता: प्रत्येक मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान में स्वीकृत पदों के सापेक्ष न्यूनतम आवश्यक स्थायी शिक्षक होने अनिवार्य हैं।
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संकाय की दोहरी गणना पर रोक: किसी एक संस्थान में पूर्णकालिक रूप से कार्यरत शिक्षक को दूसरे संस्थान या प्रशासनिक कार्यालय में मुख्य संकाय के रूप में नहीं दर्शाया जा सकता।
एआईसीटीई के Approval Process Handbook (APH) के दिशा-निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों का कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है।
अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस पूरे मामले की जांच कराकर नियमों का उल्लंघन करने वाले आदेशों को निरस्त किया जाता है या यह व्यवस्था इसी प्रकार जारी रहती है।





