UP Technical Education Scam के खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश शासन और प्रशासनिक महकमे में जोरदार हड़कंप मच गया है। मीडिया में लगातार आ रही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की बेबाक रिपोर्टों पर Chief Minister Yogi Adityanath ने तत्काल स्वतः संज्ञान लिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन Principal Secretary (प्राविधिक शिक्षा) को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर स्थानांतरित कर दिया है। इसके साथ ही विभाग को भ्रष्टाचार-मुक्त करने के लिए एक कड़ा प्रशासनिक फेरबदल लागू किया गया है।
H2: UP Technical Education Scam पर CM Yogi का कड़ा एक्शन और नए प्रमुख सचिव की तैनाती
शासन ने विभाग की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए वरिष्ठ और बेदाग छवि के तेजतर्रार IAS Officer Amit Gupta को Technical Education Department के नए Principal Secretary के पद पर नियुक्त किया है।
Chief Minister Office (CMO) की तरफ से नव-नियुक्त प्रमुख सचिव IAS Amit Gupta को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विभाग में वर्षों से जमे भ्रष्ट सिंडिकेट और संगठित अनियमिताओं पर बिना किसी रियायत के कठोरतम कार्रवाई की जाए।
छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों, नियमों को ताक पर रखने वाले तंत्र और अवैध वसूली के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का स्पष्ट जिम्मा अब नए नेतृत्व को सौंपा गया है।
H3: मुख्य बिंदु और ताजा प्रशासनिक अपडेट्स
-
प्रमुख सचिव का तबादला: अनियमितताओं की लगातार आ रही खबरों के बाद विभाग प्रमुख को तत्काल पद से हटाया गया।
-
IAS Amit Gupta को कमान: स्वच्छ छवि और कड़े प्रशासक के रूप में पहचाने जाने वाले IAS Amit Gupta बने नए प्रमुख सचिव।
-
शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance): नियमों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और अपात्रों को अनुचित लाभ देने वाले तंत्र की विस्तृत समीक्षा के निर्देश।
-
संस्थानों की जांच: महिला पॉलीटेक्निकों की बदहाली और दूरस्थ संस्थानों में अवैध अटैचमेंट को समाप्त करने पर जोर।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित प्रशासनिक विवरण):
| विवरण बिन्दु | आधिकारिक विवरण / वर्तमान स्थिति |
| संबंधित विभाग | प्राविधिक शिक्षा विभाग (Technical Education Department, UP) |
| प्रमुख मामला | UP Technical Education Scam (नियम उल्लंघन, अवैध संबद्धीकरण, ट्रांसफर नीति की अनदेखी) |
| सर्वोच्च प्रशासनिक कदम | तत्कालीन Principal Secretary का तत्काल स्थानांतरण |
| नवनियुक्त प्रमुख सचिव | वरिष्ठ IAS अधिकारी Amit Gupta |
| कार्रवाई का आधार | समाचार पत्रों (क्राइम वीक, अवध 24 दैनिक आदि) की खोजी रिपोर्ट पर CM का स्वतः संज्ञान |
| जांच का मुख्य केंद्र | AICTE नियम उल्लंघन, DPC धांधली, अवैध अटैचमेंट और Transfer Policy 2026 |
H2: मीडिया खुलासे से सामने आई धांधली: कैसे तैयार हुआ था अनियमिताओं का खेल?
समाचार पत्रों जैसे ‘क्राइम वीक’ और ‘अवध 24 दैनिक’ सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं की खोजी पत्रकारिता ने प्राविधिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की परतें खोली थीं। रिपोर्टों में सीधे तौर पर नियमों को दरकिनार कर चहेतों को उपकृत करने के गंभीर आरोप सामने आए थे।
1. नियमावलियों की खिचड़ी और अपात्रों को पदोन्नति:
विभागीय स्तर पर 1990 की सेवा नियमावली, 2021 की नियमावली और AICTE 2019 के तय मापदंडों को मनमाने ढंग से मिलाकर चहेते कार्मिकों को पदोन्नति (DPC) दिलाने का अनुचित प्रयास किया जा रहा था।
2. अवैध संबद्धीकरण (Attachment Syndicate) और दोहरे प्रभार:
वर्षों से जमे अधिकारियों और पसंदीदा अफसरों को अवैध संबद्धीकरण तथा दोहरे प्रभार देकर राजकोष से करोड़ों रुपये के वेतन का बंदरबांट किया जा रहा था, जिससे मूल संस्थाओं में पठन-पाठन ठप पड़ गया।
3. Transfer Policy 2026 का खुला उल्लंघन:
शासनादेश और निर्धारित स्थानांतरण नीति को दरकिनार कर रसूखदार अधिकारियों को मनपसंद प्राइम लोकेशंस पर लंबे समय तक बनाए रखा गया, जिससे प्रशासनिक संतुलन बिगड़ गया।
4. छात्राओं और गरीब विद्यार्थियों के अधिकारों पर असर:
विशेषकर राजकीय महिला पॉलीटेक्निक संस्थानों की बदहाली, दूरदराज के तकनीकी संस्थानों में कथित सुविधा शुल्क की मांग और शिक्षकों/अधिकारियों के अवैध अटैचमेंट के चलते कक्षाएं प्रभावित हुईं, जिसका सीधा नुकसान गरीब छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ा।
H2: प्रशासनिक फेरबदल के मायने और आगे की संभावित कार्रवाई
IAS Amit Gupta के कार्यभार संभालते ही विभागीय गलियारों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक स्थानांतरण नहीं है, बल्कि विभाग में व्यापक सफाई अभियान की शुरुआत है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से एक ही स्थान पर कुंडली मारकर बैठे अधिकारियों के अटैचमेंट कब रद्द होते हैं और नियमों की अनदेखी करने वाले सिंडिकेट पर जांच की आंच कितनी दूर तक पहुंचती है।
प्राविधिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में शुचिता, पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए शासन की यह सख्त पहल एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।
अनिल तिवारी, बेबाक लेखक





