UP Technical Education Scam: उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग (Technical Education Department) में AICTE के नियमों और स्थापित संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखकर पदोन्नति में बड़ा खेल किए जाने की बात सामने आई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विभागीय नियमों को दरकिनार करते हुए 195 Lecturers का नियम-विरुद्ध DPC कराकर Head of Department (HOD) के पदों पर प्रमोशन दे दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ लेखक और बेबाक पत्रकार Anil Tiwari ने अपने आलेख में तथ्यपरक आंकड़े सामने रखते हुए शासन और मंत्री की भूमिका पर सीधे सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इस गैर-कानूनी कदम से प्रदेश के सरकारी खजाने को हर साल करीब 30 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।
UP Technical Education Scam में मंत्री और चहेतों की कार्यप्रणाली पर सवाल
उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग में उपजे इस असंतोष के पीछे कथित तौर पर विभागीय मंत्री श्री आशीष पटेल और उनके करीबियों की कार्यप्रणाली को मुख्य वजह बताया जा रहा है। मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री के सहपाठी श्री अवधेश पटेल को लेकर हो रही है।
बेबाक लेखक Anil Tiwari के अनुसार, अवधेश पटेल AICTE के मानकों के मुताबिक निर्धारित योग्यता और अर्हता पूरी नहीं करते हैं, फिर भी वे विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आरोपों के मुताबिक, लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सीधी भर्ती के पदों और सेवा नियमावली को ताक पर रखकर 250 Lecturers को पहले Grade Pay ₹5400/₹6000 से सीधे Grade Pay ₹6600 पर प्रमोट किया गया। जबकि सेवा नियमों के तहत यह चयन समिति के जरिए चरणबद्ध तरीके से ₹7000 और फिर ₹8000 पर होना चाहिए था।
इसके बाद, इन शिक्षकों को सीधे Grade Pay ₹9000 (Pay Level-13A1) पर पहुंचाकर HOD पद का वित्तीय लाभ दे दिया गया। इस मनमाने फैसले से विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रहे उच्च शिक्षित (M.Tech/Ph.D.) प्राध्यापकों के अवसर समाप्त हो गए हैं और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु और आंकड़े
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सीधी भर्ती के पदों पर बैकडोर एंट्री: UPPSC के जरिए होने वाली HOD भर्ती के पदों पर नियम-विरुद्ध पदोन्नति दी गई।
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वरिष्ठता की अनदेखी: 20 वर्ष की सेवा वाले योग्य शिक्षक अभी भी Grade Pay ₹7000 पर हैं, जबकि कथित संरक्षण प्राप्त 9 वर्ष की सेवा वाले शिक्षकों को Grade Pay ₹9000 मिल रहा है।
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दागी चेहरों को मलाई: मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा Pharmacy Colleges की जांच और GeM Portal प्रकरण में फंसे शिक्षकों का रुका परिणाम जारी कर उन्हें भी HOD की जिम्मेदारी दी गई।
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भारी वित्तीय भार: प्रति शिक्षक हर महीने लगभग ₹1,25,000 का अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है।
📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका):
| विवरण बिन्दु | विभागीय नियम / मानक | वर्तमान स्थिति (आरोपों के अनुसार) |
| प्रमोशन अथॉरिटी | UPPSC सीधी भर्ती / चयन समिति | विभागीय स्तर पर कथित अवैध DPC |
| पे-स्केल अपग्रेड | ₹5400 ➔ ₹7000 ➔ ₹8000 | सीधे ₹6600 और ₹9000 (Pay Band-IV) |
| लाभान्वित शिक्षक | योग्यता एवं वरिष्ठता के आधार पर | 195 Lecturers को मनचाही HOD पोस्टिंग |
| प्रति माह अतिरिक्त भुगतान | शून्य (नियम सम्मत वेतन) | लगभग ₹1,25,000 प्रति शिक्षक अतिरिक्त |
| राजस्व को नुकसान | शून्य वित्तीय हानि | ₹2.43 करोड़/माह (करीब ₹30 करोड़/वर्ष) |
| विधिक आधार | AICTE Regulations (3 मई 2018) | कोर्ट के आदेशों और नियमों की कथित अवहेलना |
पृष्ठभूमि और खजाने को प्रति वर्ष 30 करोड़ का नुकसान
संसद ने पूरे देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 1987 में AICTE Act पारित किया था। इसके तहत तय मानकों को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश में 3 मई 2018 को लागू किया गया था।
लेकिन UP Technical Education Scam के तहत नियमों को ताक पर रखते हुए 250 में से 195 शिक्षकों को मनमुताबिक HOD बना दिया गया।
जिन शिक्षकों को नियमानुसार ₹1,00,000 से ₹1,25,000 मिलना चाहिए था, वे अब प्रतिमाह लगभग ₹2,50,000 तक उठा रहे हैं।
सीधे गणित के अनुसार:
(195 शिक्षक × ₹1,25,000 प्रतिमाह अतिरिक्त वेतन) = ₹2.43 करोड़ प्रति माह
इस हिसाब से सरकारी खजाने से हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त और अनुचित वित्तीय भार वहन किया जा रहा है।
राजनीतिक व प्रशासनिक हलचल: निष्पक्ष जांच की मांग
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद शासन की पारदर्शी नीतियों और जीरो टॉलरेंस के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वरिष्ठ लेखक और पत्रकार Anil Tiwari ने अपने आलेख के माध्यम से सरकार से स्पष्ट मांग की है कि:
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195 शिक्षकों को HOD पद पर दी गई पदोन्नति और Pay Level-13A1 दिए जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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नियम-विरुद्ध की गई DPC को तत्काल निरस्त किया जाए।
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सरकारी खजाने से दिए गए अतिरिक्त वेतन की नियमानुसार रिकवरी (वसूली) की जाए।
उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग में सामने आई यह विसंगति योग्य शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने वाली है। वरिष्ठ लेखक अनिल तिवारी द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि शासन इस पर क्या संज्ञान लेता है और जांच के क्या निर्देश जारी होते हैं।





