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संकट में अवसर: भारतीय अर्थव्यवस्था की नई उड़ान

Shaktikanta Das Indian Economy को लेकर एक ऐसा विजन पेश किया है जिसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का ध्यान खींचा है। एआईएमए (AIMA) लीडरशिप कॉनक्लेव में बोलते हुए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत ने न केवल वैश्विक संकटों का सामना किया है, बल्कि हर मुश्किल दौर से वह पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है।

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अस्थिर दुनिया में भारत का मज़बूत प्रदर्शन दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद, Shaktikanta Das Indian Economy की स्थिरता पर भरोसा जताया है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही है। पिछले पांच वर्षों की औसत वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय बाजार का आधार बहुत गहरा और मजबूत है।

नीतियों की निरंतरता और बुनियादी ढांचे का विकास Shaktikanta Das Indian Economy की सफलता के पीछे ठोस नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास को मुख्य कारण मानते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महंगाई पर नियंत्रण रखना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि महंगाई कम होने से आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ती है। जब घरेलू मांग मजबूत होती है, तो बाहरी झटकों का अर्थव्यवस्था पर असर कम हो जाता है।

वैश्विक मंच पर भारत की बदलती तस्वीर अंत में, Shaktikanta Das Indian Economy के परिवर्तनकारी दौर का जिक्र करते हुए बोले कि भारत अब केवल बर्दाश्त करने वाला देश नहीं, बल्कि खुद को बदलने वाला देश बन गया है। कूटनीति और निर्णायक कदमों के दम पर भारत ने साबित कर दिया है कि वह ऊर्जा संकट और आर्थिक जोखिमों के बीच भी अपना रास्ता बनाना जानता है। आने वाले समय में यह लचीलापन भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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