🌐 Language / भाषा
  • हिन्दी (Hindi)
  • বাংলা (Bengali)
  • ਪੰਜਾਬੀ (Punjabi)
  • ગુજરાતી (Gujarati)
  • मराठी (Marathi)
  • தமிழ் (Tamil)
  • తెలుగు (Telugu)
  • ಕನ್ನಡ (Kannada)
  • മലയാളം (Malayalam)
  • ଓଡ଼ିଆ (Odia)
  • اردو (Urdu)
  • অસમীয়া (Assamese)
🌐 Language / भाषा
  • हिन्दी (Hindi)
  • বাংলা (Bengali)
  • ਪੰਜਾਬੀ (Punjabi)
  • ગુજરાતી (Gujarati)
  • मराठी (Marathi)
  • தமிழ் (Tamil)
  • తెలుగు (Telugu)
  • ಕನ್ನಡ (Kannada)
  • മലയാളം (Malayalam)
  • ଓଡ଼ିଆ (Odia)
  • اردو (Urdu)
  • অસમীয়া (Assamese)

Ram Mandir Trust Controversy: स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा फैसला

Ram Mandir Trust Controversy अब अयोध्या में प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गई है। Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust में दायित्व परिवर्तन के फौरन बाद नवनियुक्त महासचिव Swami Govind Dev Giri ने पूर्व अंतरिम महासचिव Krishna Mohan के आदेश को पलटते हुए निष्कासित किए गए तीनों कर्मियों को वापस सेवा में ले लिया है। इस बड़े प्रशासनिक कदम के साथ ही ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच का आंतरिक मतभेद अब खुलकर सामने आने लगा है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Larsen & Toubro ने भव्य राम मंदिर के डिजाइन और निमार्ण का काम सफलतापूर्वक  किया पूरा | Ram Mandir Inauguration Ram Mandir Pran Pratishtha Larsen and  Toubro designed and constructed Ayodhya Ram

Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust में बड़ा प्रशासनिक उलटफेर

धर्मनगरी Ayodhya में राम मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के पुनर्गठन के बाद से ही हलचल तेज थी। हाल ही में 2 सितंबर को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में दायित्व परिवर्तन किया गया था, जिसमें पूर्व कोषाध्यक्ष Swami Govind Dev Giri को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया और Krishna Mohan को अंतरिम महासचिव पद से पदमुक्त कर दिया गया था।

पदभार ग्रहण करते ही Swami Govind Dev Giri ने शनिवार को लिखित आदेश जारी कर उन तीन कर्मचारियों की मंदिर परिसर में वापसी सुनिश्चित कर दी, जिन्हें कुछ समय पहले अनुशासनहीनता व शिकायतों के आधार पर सेवामुक्त किया गया था। इस नए आदेश के बाद ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक खींचतान और पदाधिकारियों के मध्य अंतर्विरोध के स्वर स्पष्ट रूप से सुनाई देने लगे हैं।

राम मंदिर, अयोध्या - विकिपीडिया

मुख्य बिंदु और ताजा आंकड़े

  • आदेश वापसी: नवनियुक्त महासचिव Swami Govind Dev Giri ने पूर्व अंतरिम महासचिव Krishna Mohan द्वारा हटाए गए तीनों कर्मचारियों को बहाल किया।

  • बहाल कर्मचारी: गर्भगृह में तैनात रहे Bajrang Pathak, Krishna Dutt Tiwari और लाकर सेवा में कार्यरत Sandeep Gupta की वापसी हुई।

  • कारसेवक परिवार से संबंध: बहाल कर्मियों में 1990 के दशक के मंदिर आंदोलन में शामिल रहे कारसेवक स्वर्गीय वासुदेव गुप्ता के पुत्र Sandeep Gupta भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्व महासचिव Champat Rai ने नियुक्त किया था।

  • पदाधिकारियों में अंतर्विरोध: 2 सितंबर को हुए पुनर्गठन के बाद ट्रस्ट के भीतर यह पहला बड़ा विरोधाभासी प्रशासनिक निर्णय है।

📊 Quick Fact-Check Table (त्वरित डेटा तालिका)

विवरण (Parameter) आधिकारिक तथ्य (Official Facts)
संबंधित संस्था Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, Ayodhya
वर्तमान महासचिव Swami Govind Dev Giri (पूर्व कोषाध्यक्ष)
पूर्व अंतरिम महासचिव Krishna Mohan
कार्रवाई का स्वरूप निष्कासन आदेश रद्द, 3 कर्मियों की सेवा में वापसी
प्रभावित कर्मचारी Bajrang Pathak, Krishna Dutt Tiwari, Sandeep Gupta
शिकायत का मूल आधार महिला CO की शिकायत और विदेशी श्रद्धालु का प्रकरण
विवाद का मुख्य कारण पदाधिकारियों के मध्य प्रशासनिक मतभेद व जांच प्रक्रिया

पृष्ठभूमि, टाइमलाइन और विवाद की असली वजह

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत करीब एक पखवाड़े पहले हुई थी। Ram Janmabhoomi परिसर में तैनात एक महिला पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) ने ट्रस्ट को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मंदिर के गर्भगृह में सेवा दे रहे कर्मी Bajrang Pathak और Krishna Dutt Tiwari अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं और उन्होंने महिला अधिकारी के साथ आए आगंतुक अतिथि से दुर्व्यवहार किया है।

इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तत्कालीन अंतरिम महासचिव Krishna Mohan ने दोनों कर्मियों से उनका पक्ष मांगा। हालांकि, उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक करार देते हुए अंतरिम महासचिव ने पहले दोनों को मंदिर से हटाकर लगभग तीन किलोमीटर दूर बाग बिजेसी स्थित ‘तीर्थ क्षेत्र पुरम’ भेज दिया और उसके एक-दो दिन बाद उनकी सेवाएं पूरी तरह समाप्त कर दीं।

इसके तुरंत बाद, एक विदेशी श्रद्धालु द्वारा की गई शिकायत के आधार पर ट्रस्ट की लाकर सेवा में तैनात Sandeep Gupta को भी सेवा से बाहर कर दिया गया। Sandeep Gupta राम मंदिर आंदोलन के चर्चित कारसेवक स्वर्गीय वासुदेव गुप्ता के पुत्र हैं, जिन्हें पूर्व महासचिव Champat Rai द्वारा सेवा में रखा गया था। उन पर हुई इस एकतरफा कार्रवाई को लेकर ट्रस्ट कर्मियों में गहरा असंतोष और भय व्याप्त हो गया था, क्योंकि कर्मियों का आरोप था कि संदीप गुप्ता का पक्ष सुने बिना ही उन पर दंडात्मक कार्रवाई की गई थी।

Swami Govind Dev Giri का हस्तक्षेप और प्रशासनिक प्रभाव

Feeling blessed: Swami Govind Dev Giri Maharaj on his appointment on Ram  temple trust board

जैसे ही 2 सितंबर की बैठक के बाद Swami Govind Dev Giri ने महासचिव का कार्यभार संभाला, यह मामला उनके समक्ष पहुंचा। कर्मचारियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए अपनी बात रखी। पूरे मामले की समीक्षा के बाद नए महासचिव ने पाया कि निष्कासन की यह प्रक्रिया नियमों और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं थी।

शनिवार को Swami Govind Dev Giri ने प्रशासनिक कदम उठाते हुए तीनों कर्मियों की सेवा बहाली का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। हालांकि, मंदिर प्रशासन द्वारा अभी तक इन कर्मियों को सौंपे जाने वाले नवीन दायित्वों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं, इस मामले में बहाल कर्मी Bajrang Pathak का बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें औपचारिक रूप से कभी निकाला ही नहीं गया था और वे पहले से ही कार्यरत थे।

इस प्रशासनिक उलटफेर ने स्पष्ट कर दिया है कि Ram Mandir Trust Controversy केवल कर्मचारियों की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के प्रशासनिक दृष्टिकोण और कार्यशैली में आए बदलाव का सीधा संकेत है।

अयोध्या के संतों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि दायित्व परिवर्तन के बाद ट्रस्ट की आंतरिक कार्यप्रणाली पूरी तरह नए सिरे से व्यवस्थित की जा रही है। जहां पूर्व अंतरिम महासचिव सख्त अनुशासनात्मक रवैया अपना रहे थे, वहीं नए महासचिव ने पुराने सेवादारों और कारसेवक परिवारों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए फैसले को निरस्त किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक संतुलन और अनुशासन बनाए रखने के लिए आगे क्या नई आचार संहिता लागू की जाती है।

राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT ने सौंपी रिपोर्ट, कई तथ्य अब भी गोपनीय - ram  mandir donation case sit report submitted to government ntc dhrj - AajTak

⚡ SHARE THIS POST

Related Posts

अमित शाह का बड़ा खुलासा: 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण, 2014 की चुनौतियां

अमित शाह ने गोवा में सुरक्षा समीक्षा के दौरान बताया कि 2019 से 2026 के बीच 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ और ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।

Read more

प्याज की कीमत में 76% का जोरदार उछाल: नासिक से दिल्ली तक हाहाकार, जानिए क्यों बढ़े दाम?

प्याज की कीमत में एक महीने में 76% का जोरदार उछाल आया है। खरीफ बुआई में देरी और बफर स्टॉक की कमी के बीच जानिए मंडियों का ताजा हाल।

Read more