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Delhi Court Slams CBI: दामाद के चक्कर में ससुर के खाते किए फ्रीज, अदालत ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए दिया बड़ा आदेश

Delhi Court Slams CBI की यह बड़ी कानूनी खबर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने ₹3 करोड़ के एक हाई-प्रोफाइल रिश्वत मामले में आरोपी के ससुर के बैंक खातों को पूरी तरह से ब्लॉक करने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने एजेंसी की इस कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना और \’क्रूर\’ करार दिया है।

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अदालत का सख्त रुख: विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित गुलशन कुमार की याचिका पर यह बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सीबीआई को तत्काल प्रभाव से गुलशन कुमार के तीनों बैंक खातों को अनफ्रीज करने का सख्त निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच के नाम पर किसी भी आम नागरिक को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता है।

रिश्तेदारी की सजा नहीं: इस कानूनी बहस के दौरान Delhi Court Slams CBI के कड़े शब्दों ने जांच अधिकारियों को सचेत किया है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए किसी के खाते फ्रीज नहीं किए जा सकते कि उसका कोई करीबी रिश्तेदार किसी अपराध में संदिग्ध या आरोपी है। जांच एजेंसियों के पास किसी भी निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन करने की खुली छूट नहीं है।

घोटाले से कोई संबंध नहीं: कोर्ट ने जांच रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण करते हुए पाया कि इस ₹3 करोड़ के रिश्वत मामले की अपराध की कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से गुलशन कुमार के खातों का दूर-दूर तक कोई सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं था। सीबीआई खुद भी कोर्ट के सामने यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही कि गुलशन कुमार की रिश्वत की रकम के लेन-देन में कोई भी भूमिका थी।

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: मामले की सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि जांच अधिकारी (आईओ) ने खातों को फ्रीज करने से पहले उनके बैंक स्टेटमेंट्स तक की जांच नहीं की थी और न ही ऐसा करने का कोई ठोस कारण रिकॉर्ड पर दर्ज किया था। अदालत ने कहा कि कानून के दायरे में रहकर ही जांच की जानी चाहिए, इसे आम जनता को प्रताड़ित करने का हथियार नहीं बनाया जा सकता।

अदालत का अंतिम फैसला: सीबीआई ने दलील दी थी कि गुलशन कुमार ने अपने फरार दामाद प्रभात कुमार कपूर को छिपाने में मदद की थी, लेकिन कोर्ट ने इस दावे को भी खारिज कर दिया क्योंकि आरोपी की गिरफ्तारी के दो दिन बाद खाते फ्रीज किए गए थे। इस तरह Delhi Court Slams CBI के इस कड़े रुख के बाद अब निर्दोष नागरिकों को बिना वजह बैंक खाते ब्लॉक होने की मनमानी कार्रवाई से बड़ी सुरक्षा मिलेगी।

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