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शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव: अब स्कूलों में गूंजेंगी तीन भाषाएं

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CBSE Three Language Formula को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को एक नया सर्कुलर जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि सात दिनों के भीतर इसे लागू करना सुनिश्चित करें, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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सात दिनों का अल्टीमेटम और किताबों की शर्त CBSE Three Language Formula के कार्यान्वयन को लेकर बोर्ड ने साफ किया है कि चाहे स्कूलों के पास वर्तमान में किताबें उपलब्ध हों या नहीं, लेकिन कक्षा 6 में तीसरी भाषा (R3) की पढ़ाई अभी से शुरू हो जानी चाहिए। स्कूलों को OASIS पोर्टल पर जाकर चुनी गई भाषा का विवरण अपडेट करने के लिए केवल एक हफ्ते का समय दिया गया है। यह फैसला छात्रों के भाषाई ज्ञान को विस्तृत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

क्या है R1, R2 और R3 का गणित? CBSE Three Language Formula के तहत अब छात्रों को तीन अलग-अलग भाषाओं का अध्ययन करना होगा। R1 मुख्य रूप से हिंदी या अन्य कोई प्राथमिक भाषा होगी, जबकि R2 उससे अलग एक स्टैंडर्ड स्तर की भाषा होगी। सबसे महत्वपूर्ण R3 है, जो कक्षा 6 से शुरू होगी। नियम की शर्त यह है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए, हालांकि छात्र तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा का चयन भी कर सकते हैं।

बोर्ड परीक्षा में पास होना होगा अनिवार्य CBSE Three Language Formula का प्रभाव केवल कक्षा 6 तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा पर भी पड़ेगा। अब छात्रों को बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए तीनों भाषाओं में सफल होना जरूरी होगा। इस ऐतिहासिक कदम के जरिए सीबीएसई का लक्ष्य भारतीय मूल की भाषाओं के साथ-साथ छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

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