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प्याज की कीमत में 76% का जोरदार उछाल: नासिक से दिल्ली तक हाहाकार, जानिए क्यों बढ़े दाम?

प्याज की कीमत में पिछले एक महीने के भीतर अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। देश की सबसे बड़ी थोक मंडी नासिक में प्याज के भाव करीब 76 फीसदी तक उछल चुके हैं, जिसने आम आदमी की रसोई के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।

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थोक मंडियों के साथ-साथ खुदरा बाजारों में भी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर प्याज का औसत खुदरा भाव 41 रुपये प्रति किलो को पार कर चुका है, जबकि कई राज्यों में यह 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।

Damage to crops shoots up onion prices by 20 per cent in Lasalgaon | Pune  News - The Indian Express

नासिक मंडी में रिकॉर्ड तेजी: जानिए क्या है ताजा स्थिति

एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक (लासलगांव) में एक महीने पहले थोक भाव करीब 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 3,600 से 3,750 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है।

उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर थोक भाव 3,397 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। पिछले साल की तुलना में उत्पादन लगभग स्थिर (307.37 लाख टन अनुमानित) रहने के बावजूद मंडियों में आवक की कमी से कीमतें लगातार चढ़ रही हैं।

राज्यवार थोक मूल्यों में बढ़ोतरी (रुपये प्रति किलो)

राज्य 23 जुलाई (थोक भाव) 23 अगस्त (थोक भाव)
उत्तर प्रदेश ₹30 – ₹40 ₹45 – ₹50
दिल्ली ₹25 – ₹30 ₹45 – ₹50
हरियाणा ₹25 – ₹35 ₹50 – ₹60
झारखंड ₹26 – ₹30 ₹40 – ₹55
मध्य प्रदेश ₹20 ₹40
उत्तराखंड ₹18 ₹40
पंजाब ₹25 ₹40
छत्तीसगढ़ ₹20 – ₹22 ₹42 – ₹45

अचानक क्यों बढ़ी प्याज की कीमत? समझिए 3 बड़े कारण

बाजार विशेषज्ञों और कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मौजूदा मूल्य वृद्धि के पीछे तीन मुख्य कारक काम कर रहे हैं:

  1. खरीफ बुआई में देरी: मानसून की शुरुआती अनिश्चितता और भारी बारिश के असंतुलन के चलते खरीफ सीजन की बुआई में देरी हुई है। नई फसल बाजार में आने में समय लगेगा।

  2. रबी स्टॉक में गिरावट: पिछले सीजन (रबी) का प्याज का भंडार धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। अगस्त-सितंबर का समय हमेशा से सप्लाई गैप का दौर माना जाता है।

  3. कमजोर बफर स्टॉक और जमाखोरी: सरकारी बफर स्टॉक खरीद लक्ष्य से काफी पीछे रह गया है। इस कमी को भांपते हुए बिचौलियों और जमाखोरों ने सप्लाई चेन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

Prices of onions go up at wholesale market in Dindigul - The Hindu

बफर स्टॉक का गणित: सरकार के सामने क्या है बड़ी चुनौती?

सरकार ने इस वर्ष 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई अंत तक केवल 1.20 लाख टन ही खरीदा जा सका। किसानों को खुले बाजार में बेहतर दाम मिलने के कारण उन्होंने सरकारी एजेंसियों को प्याज कम बेचा।

यही वजह है कि केंद्र सरकार को खरीद भाव 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल तक करना पड़ा। सीमित स्टॉक होने की वजह से खुले बाजार में हस्तक्षेप करके दामों को तुरंत नीचे लाना एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

क्या आगे और रुलाएगा प्याज? जानिए आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक खरीफ की नई फसल मंडियों में पूरी तरह नहीं आ जाती, तब तक अगले डेढ़ महीने तक प्याज की कीमत उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।

त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण सरकार अब संवेदनशील और अधिक महंगाई वाले शहरों में बफर स्टॉक से सस्ती दरों पर प्याज उतारने की तैयारी कर रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं को त्वरित राहत मिल सके।

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