Ram Mandir Chanda Chori Mamla में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जांच एजेंसी की फाइनल रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की हेराफेरी में इन दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है। यह अंतिम रिपोर्ट अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है ताकि आगे की विभागीय प्रक्रिया पूरी की जा सके।
Ram Mandir Chanda Chori Mamla: SIT की फाइनल रिपोर्ट में क्या निकला?
शासन द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच दल की कमान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विजय विश्वास पंत संभाल रहे थे। जांच एजेंसी ने विस्तृत पड़ताल के बाद स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर के दान पात्रों से हुई वित्तीय अनियमितताओं में शीर्ष पदाधिकारियों का कोई हाथ नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले में सीधे तौर पर गिनती कक्ष (Counting Room) में तैनात निचले स्तर के कर्मचारी ही संलिप्त थे।

इस केस में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) में कुल 8 कर्मचारियों को नामजद किया गया था, जिन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है।
📊 मुख्य बिंदु: एक नज़र में पूरी जांच रिपोर्ट
| प्रमुख बिंदु | SIT जांच रिपोर्ट का विवरण |
| मामला | Ram Mandir Chanda Chori Mamla (दान राशि में हेराफेरी) |
| जांच कमेटी | वरिष्ठ आईएएस विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली SIT |
| क्लीन चिट | चंपत राय (पूर्व महासचिव) एवं डॉ. अनिल मिश्रा |
| कुल नामजद आरोपी | 8 कर्मचारी (सभी गिरफ्तार) |
| दर्ज धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम |
| अन्य जांच | सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की जांच समानांतर जारी |
कैसे सामने आई थी चढ़ावे की चोरी? समझें पूरी टाइमलाइन
अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में रोजाना लाखों श्रद्धालु दर्शन और दान के लिए पहुंचते हैं। यह पूरा विवाद तब उजागर हुआ जब दान काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की गई।
सीसीटीवी कैमरों की 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की रिकॉर्डिंग खंगालने पर पता चला कि गिनती कक्ष में बैठे कर्मचारी करीब 70 बार नकदी को छिपाकर बाहर ले जा रहे थे।
प्रारंभिक जांच में 7 बार नकदी की सीधी चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई थी। इसके बाद ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में पहली आधिकारिक FIR दर्ज की गई।
FIR में मुख्य रूप से अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और राम शंकर यादव उर्फ टीनू को आरोपी बनाया गया था।
इस्तीफे से लेकर क्लीन चिट तक: चंपत राय पर क्यों उठे थे सवाल?
जब दान राशि में हेराफेरी की खबरें सार्वजनिक हुईं, तो पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

Ram Mandir Chanda Chori Mamla तूल पकड़ते ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
अब यूपी सरकार की एसआईटी ने साफ कर दिया है कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था के केंद्र में हुई इस चोरी की साजिश केवल इन 8 कर्मचारियों तक ही सीमित थी।
आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट की जांच पर टिकी निगाहें
हालांकि राज्य सरकार की SIT ने अपनी जांच पूरी कर चंपत राय और अनिल मिश्रा को दोषमुक्त करार दे दिया है, लेकिन मामले का कानूनी अध्याय अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक अन्य स्वतंत्र विशेष जांच टीम (SIT) अभी भी इस पूरे वित्तीय प्रकरण की अलग से तफ्तीश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट वाली SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।




